“व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण, और समाज निर्माण से राष्ट्र के परम वैभव का पुनरुत्थान।”
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आंतरिक शांति, मानसिक संतुलन और आत्मबल का जागरण। जब तक व्यक्ति का चरित्र सुदृढ़ नहीं होगा, तब तक किसी महान समाज की कल्पना संभव नहीं।
परिवारों में आत्मीय संस्कार और समाज में समरसता। नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ना और सामाजिक भेदभाव को मिटाकर बंधुत्व स्थापित करना।
सांस्कृतिक स्वाभिमान, सच्चा इतिहास, स्वदेशी स्वावलंबन और नागरिक कर्तव्य। भारत को अपने शाश्वत गौरव के साथ पुनः विश्व गुरु बनाना।
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय · राष्ट्रीय गीत
03:15
ध्वनि, शब्द और अर्थ का ऐसा पवित्र संगम जो हृदय में राष्ट्रभक्ति, सेवा और त्याग की अमर ऊर्जा का संचार करता है।
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आधुनिक जीवन में प्रयोग: कार्यस्थल पर तनाव का कारण कार्य नहीं, बल्कि परिणाम और पद की अति-चिंता है। जब आप परिणाम की चिंता त्यागकर कार्य की गुणवत्ता पर १००% ध्यान देते हैं, तो सफलता और मानसिक शांति स्वतः प्राप्त होती है।
शुद्ध घृत अथवा तिल के तेल का दीपक वातावरण से सूक्ष्म रोगजनकों को दूर करता है। इसकी १८००K कोमल पीली ज्योति नेत्रों व मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को शांत करती है। पूर्वजों ने जिसे श्रद्धा कहा, आधुनिक विज्ञान उसे आरोग्य सिद्ध करता है।
“कार्यस्थल पर अत्यधिक तनाव, राजनीति और परिणाम की चिंता से मन अशांत है, क्या करूँ?”
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