अमृतवचन
“परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः” — सेवा ही जीवन का वास्तविक सौंदर्य है।

राष्ट्र यज्ञ में आहुति

राष्ट्र उत्थान सेवा संकल्प: अपने समय और हुनर का सदुपयोग

सच्चा धर्म केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि कर्मक्षेत्र में उतरने से जीवंत होता है। आइए, भारत के पुनरुत्थान में अपने ज्ञान, कौशल और ऊर्जा का योगदान दें।

चार सेवा प्रभाग: आपकी रुचि, आपकी भूमिका

आप चाहे एक शोधार्थी हों, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, गृहणी या कॉलेज विद्यार्थी — राष्ट्र निर्माण में हर हाथ का स्वागत है।

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१. ज्ञान एवं अनुवाद सेवा

संस्कृत पाण्डुलिपियों, उपनिषदों व वेदों का हिन्दी व अंग्रेजी में प्रामाणिक अनुवाद, आलेख लेखन एवं शास्त्रीय तथ्यों का सत्यापन।

सप्ताह में २-३ घंटे (ऑनलाइन)

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२. तकनीकी व डिजाइन सेवा

वेब विकास, वर्डप्रेस एवं एलिमेंटोर टेम्पलेट निर्माण, सोशल मीडिया विजुअल्स, इन्फोग्राफिक्स एवं ऑडियो-वीडियो पॉडकास्ट संपादन।

सप्ताह में ३-४ घंटे (रिमोट)

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३. बाल संस्कार शाला आचार्य

अपनी कॉलोनी, सोसायटी या गाँव में रविवार के दिन बच्चों को श्लोक, पंचतंत्र की प्रेरक कहानियां और नैतिक संस्कार सिखाना।

रविवार: १-२ घंटा (स्थानीय)

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४. पर्यावरण एवं सामाजिक सेवा

औषधीय वृक्षारोपण (तुलसी, नीम, पीपल अभियान), जल संरक्षण जागरूकता, रक्तदान शिविर और आपदा सेवा में प्रत्यक्ष शारीरिक सहभागिता।

मासिक सेवा अभियान

राष्ट्र सेवा संकल्प पत्र भरें

कृपया अपनी सही जानकारी दर्ज करें ताकि हमारे मंडल संयोजक आपसे शीघ्र संपर्क कर सकें।