उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
हिन्दी भावार्थ: कोई भी कार्य केवल मन में इच्छा करने या सोचने से पूरा नहीं होता, बल्कि कठिन परिश्रम और पुरुषार्थ से ही सिद्ध होता है। सोए हुए सिंह के मुख में हिरण स्वयं चलकर कभी प्रवेश नहीं करता; उसे भी शिकार के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है।
English Translation: Truly, all tasks are accomplished only through dedicated effort and hard work, never by mere daydreaming or idle wishes. Deer do not enter of their own accord into the mouth of a sleeping lion.
व्यावहारिक सीख: अपनी योजनाओं को केवल मन में न रखें। प्रतिदिन अपने लक्ष्य की दिशा में ठोस कर्म करें।
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥
हिन्दी भावार्थ: सच्ची विद्या मनुष्य को विनय (सदाचार व नम्रता) देती है; विनय से पात्रता (योग्यता) आती है; योग्यता से धन प्राप्त होता है; धन से धर्म (सत्कर्म) संपन्न होता है और धर्म से ही स्थायी सुख व शांति मिलती है।
English Translation: True knowledge bestows humility; from humility arises capability and worthiness; from worthiness one earns righteous wealth; from wealth one performs noble duties (Dharma), and from Dharma arises enduring happiness.
व्यावहारिक सीख: यदि ज्ञान पाकर अहंकार बढ़े, तो वह विद्या नहीं अविद्या है। ज्ञान की पहचान विनम्रता और सेवाभाव है।
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
हिन्दी भावार्थ: “यह मेरा है और यह पराया है” — ऐसी संकीर्ण गणना केवल छोटे हृदय वाले अज्ञानी लोग करते हैं। उदार चरित्र और विशाल हृदय वाले सत्पुरुषों के लिए तो सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।
English Translation: “This is mine and that belongs to another” is the narrow reckoning of small-minded people. For those of noble and expansive character, the entire cosmos is one single loving family.
व्यावहारिक सीख: जाति, पंथ, भाषा और स्वार्थ के संकीर्ण दायरों से ऊपर उठकर प्रत्येक प्राणी के प्रति सद्भाव रखें।
अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥
हिन्दी भावार्थ: (श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं) हे लक्ष्मण! यद्यपि यह लंका सोने की बनी हुई है, फिर भी इसमें मेरी तनिक भी रुचि नहीं है। क्योंकि जन्म देने वाली माता और अपनी जन्मभूमि (मातृभूमि) स्वर्ग से भी अधिक महान और पूजनीय हैं।
English Translation: Even this magnificent Lanka fashioned of pure gold does not appeal to me, O Lakshmana. The mother who gave birth and the sacred motherland are greater and more exalted than heaven itself.
व्यावहारिक सीख: भौतिक ऐश्वर्य कितना भी आकर्षक हो, अपनी जन्मभूमि, संस्कृति और राष्ट्र की सेवा सबसे बड़ा कर्तव्य है।
सुखस्य मूलं धर्मः। धर्मस्य मूलमर्थः।
अर्थस्य मूलं राज्यम्। राज्यस्य मूलमिन्द्रियजयः॥
हिन्दी भावार्थ: सुख का मूल धर्म (सदाचार व न्याय) है; धर्म का मूल अर्थ (सच्ची संपत्ति व साधन) है; अर्थ का आधार सुदृढ़ राज्य (सुशासन) है; और सुशासन का आधार शासक व नागरिकों का इन्द्रियजय (आत्मसंयम) है।
English Translation: The root of true happiness is righteous virtue (Dharma); the root of Dharma is just wealth and resources; the root of wealth is good governance; and the root of good governance is self-mastery over one’s senses.
व्यावहारिक सीख: व्यक्तिगत संयम और नैतिक आचरण ही परिवार, समाज और राष्ट्र की समृद्धि की प्रथम नींव है।
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥
हिन्दी भावार्थ: वृक्ष दूसरों के लिए फल देते हैं, नदियां दूसरों की प्यास बुझाने के लिए बहती हैं, और गायें दूसरों के पोषण के लिए दूध देती हैं। इसी प्रकार यह मानव शरीर भी केवल अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के परोपकार के लिए मिला है।
English Translation: Trees bear fruit for the sake of others; rivers flow for the thirst of others; cows give milk to nourish others. Likewise, this human body has been bestowed solely for selfless service to creation.
व्यावहारिक सीख: जब तक जीवन में दूसरों के दुःख को दूर करने का भाव न हो, तब तक मनुष्य का जीवन सार्थक नहीं होता।
बुद्धिर्यस्य बलं तस्य निर्बुद्धेस्तु कुतो बलम्।
वने सिंहो मदोन्मत्तः शशकेन निपातितः॥
हिन्दी भावार्थ: जिसके पास बुद्धि और विवेक है, वास्तविक बल भी उसी के पास है; बुद्धिहीन व्यक्ति का शारीरिक बल भी व्यर्थ हो जाता है। जिस प्रकार वन में अहंकारी मदमस्त सिंह को एक छोटे से चतुर खरगोश ने कुएं में गिराकर समाप्त कर दिया।
English Translation: He who possesses intellect truly possesses real power; where is the strength of an unintelligent person? In the forest, the mighty arrogant lion was destroyed by a tiny clever hare.
व्यावहारिक सीख: संकट के समय घबराने या व्यर्थ क्रोध करने के स्थान पर शांत मन से युक्ति और विवेक का प्रयोग करें।
सङ्गच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते॥
हिन्दी भावार्थ: तुम सब साथ मिलकर चलो, एक स्वर में विचार-विमर्श करो और तुम्हारे मनों में परस्पर समान समझ हो। जिस प्रकार प्राचीन काल के ज्ञानी जन एकमत होकर राष्ट्र का कार्य करते थे, तुम भी संगठित रहो।
English Translation: March together in unity, communicate with one voice, and let your minds be in complete harmony, just as the enlightened sages of old fulfilled their collective responsibilities.
व्यावहारिक सीख: परिवार, कार्यक्षेत्र और राष्ट्र में मतभेदों को भुलाकर साझी दृष्टि के साथ काम करना ही सफलता की कुंजी है।
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः॥
हिन्दी भावार्थ: सत्य बोलो, और प्रिय (कल्याणकारी व मधुर) बोलो; ऐसा सत्य न बोलो जो दूसरों को पीड़ा पहुँचाए (अप्रिय सत्य); और किसी को प्रसन्न करने के लिए मीठा झूठ भी न बोलो — यही शाश्वत सनातन धर्म है।
English Translation: Speak the truth, speak what is pleasing and beneficial; do not speak unpleasing truth harshly, nor utter pleasing falsehoods—this is the eternal, timeless Dharma.
व्यावहारिक सीख: अपनी वाणी पर सदैव नियंत्रण रखें। सत्य को विनम्रता और सद्भावना के साथ प्रस्तुत करना ही वास्तविक परिपक्वता है।
उत्सवे व्यसने चैव दुर्भिक्षे राष्ट्रविप्लवे।
राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः॥
हिन्दी भावार्थ: जो उत्सव में, संकट में, अकाल के समय, देश पर आई विपत्ति में, न्यायालय (प्रशासन) में और श्मशान तक साथ खड़ा रहता है, वही वास्तव में सच्चा मित्र और बंधु है।
English Translation: He who stands steadfastly by your side in joy, in adversity, in famine, in national upheaval, during official trials, and at the cremation ground—he alone is a true friend and brother.
व्यावहारिक सीख: जो केवल अच्छे समय में साथ रहे, वह स्वार्थी है। सच्चे मित्र की परख केवल विपत्ति और कठिन समय में ही होती है।