साधना सूत्र
“स्वाध्यायान्मा प्रमदः” — स्वाध्याय और आत्म-विकास में कभी प्रमाद (आलस्य) न करो।

व्यक्तिगत स्वाध्याय व प्रगति

मेरी साधना एवं अध्ययन कक्ष

सत्य, स्वाध्याय और सेवा का निरंतर अभ्यास ही चरित्र का निर्माण करता है। यहाँ आपकी दैनिक साधना, अध्ययन प्रगति और संकल्प सुरक्षित हैं।

🔥
स्वाध्याय स्ट्रीक
१४ दिन निरंतर

⭐
सुरक्षित श्लोक संग्रह
२४ श्लोक

🌱
सेवा संकल्प स्थिति
सक्रिय सेवा सहयोगी

आज का दैनिक स्वाध्याय संकल्प (Day 15/30)

श्रीमद्भगवद्गीता साधना

श्रीमद्भगवद्गीता 6.5 | Bhagavad Gita 6.5
उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
भावार्थ: मनुष्य को चाहिए कि वह अपने मन द्वारा अपना उद्धार करे, अपने आपको नीचे न गिराए; क्योंकि मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु है।
English: Elevate yourself by your own mind, and do not degrade yourself. For the mind alone is the true friend of the self, and the mind alone is its enemy.



गीता असिस्टेंट में मनन करें →

मेरी पसंदीदा अध्ययन सामग्री


डिप्रेशन और मानसिक शांति: गीता का व्यावहारिक मार्गदर्शन | Overcoming Depression & Finding Inner Peace

श्रेणी: व्यक्ति निर्माण · सुरक्षित किया गया: २ दिन पूर्व

ब्रह्ममुहूर्त और दिनचर्या: वैदिक विज्ञान और आधुनिक न्यूरोसाइंस | Brahma Muhurta & Daily Regimen

श्रेणी: आयुर्वेद व स्वास्थ्य · सुरक्षित किया गया: ५ दिन पूर्व

पंचतंत्र की प्रेरक कथाएँ और बाल चरित्र निर्माण | Panchatantra Tales: Building Moral Character in Children

श्रेणी: बाल संस्कार · सुरक्षित किया गया: १ सप्ताह पूर्व